11/04/2022
रावण का कैलाश उठाना, जीवन की बहुत बड़ी सीख है ....
पुराणों स्मृतियों में हम पाते है, शिवजी ने सबको ज्ञान दिया है, सबको समझाया है ।। लेकिन उन्होंने रावण को कभी नही समझाया ....
किसी ने शङ्करजी से पूछा - प्रभु आप सबको समझाते है, आप रावण को क्यो नही समझाते ?
शङ्करजी ने कहा :- क्यो की मैं रावण को समझता हूं, इसलिए उसे नही समझाता .... जो लोग रावण को समझाते है, वह खुद नासमझ है ....
शङ्कर जी ने कहा - यह रावण मुझसे जब भी मिलता है, मुझे कहता है, गुरुजी इधर देखिए
शङ्कर जी बोले - क्या देखूं ??
रावण बोले - देखिए आपके तो 5 सिर है, मेरे तो दस है ...
अब जो खुद को गुरु से दुगना ऐसे ही समझे, उसे गुरु समझाए तो भी क्या समझाए ?? ज्ञान तो श्रद्धावान को मिलता है, अहंकारियों को थोड़ी न् ज्ञान प्राप्त हो सकता है ....
एक बार रावण गया कैलाश .... और कैलाश को ही सिर पर उठा लिया, कैलाश में हलचल मच गई ...पार्वती जी ने पूछा - हे देवाधिदेव यह क्या हो रहा है ??
शङ्करजी ने कहा - चेला आया है ...
पार्वती ने पूछा - तो इतनी हलचल क्यो है ??
शङ्कर जी कहा - रावण जैसे चेले आएंगे, तो हलचल ही मचेगी ....
किसी ने रावण को पूछा - यह क्या कर रहे हो ?
रावण ने कहा - गुरुजी को शिरोधार्य कर रहे है ...
भला यह कैसा शिरोधार्य ??
शिष्य को तो गुरु के चरणों मे लिपट जाना चाइये, और गुरु उसे अपने हाथों से उठाएं ....
गिरना शिष्य का काम है, और गिरे हुए को उठाना गुरु का काम है ... और रावण जैसे शिष्य सोचते है, की हम गुरु को ऊपर उठा रहे है ।।............................
जब भी हम खुद को गुरु से श्रेष्ठ समझने लग जाए, तो समझिए हमारा नाश सिर पर आ गया है । स्कूल के गुरु हो, या जीवन की शिक्षा देने वाले माता पिता, या हो सतगुरु, उनके तो चरणों मे ही लिपटा रहना चाहिए, कल्याण इसी में है ।।
।। पूज्य राजेश्वरानंद जी महाराज का प्रवचन ।।