18/01/2024
🚩*_राम मन्त्र का अर्थ...._*
र', 'अ' और 'म', इन तीनों अक्षरों के योग से *'राम' मंत्र बनता है।* यही राम रसायन है। 'र' *अग्निवाचक है। 'अ' बीज मंत्र है। 'म' का अर्थ है ज्ञान।* यह मंत्र पापों को जलाता है, किंतु पुण्य को सुरक्षित रखता है और ज्ञान प्रदान करता है। हम चाहते हैं कि पुण्य सुरक्षित रहें, सिर्फ पापों का नाश हो। *'अ' मंत्र जोड़ देने से अग्नि केवल पाप कर्मो का दहन कर पाती है* और हमारे शुभ और सात्विक कर्मो को सुरक्षित करती है।
*'म' का उच्चारण करने से ज्ञान की उत्पत्ति होती है।* हमें अपने स्वरूप का भान हो जाता है। इसलिए हम र, अ और म को जोड़कर एक मंत्र बना लेते हैं- *राम। 'म' अभीष्ट होने पर भी यदि हम 'र' और 'अ' का उच्चारण नहीं करेंगे तो अभीष्ट की प्राप्ति नहीं होगी।*
‘रा’ अक्षर के कहत ही निकसत पाप पहार ।
पुनि भीतर आवत नहिं देत ‘म’कार किंवार ।।
*अर्थात्—‘रा’ अक्षर के कहते ही सारे पाप शरीर से बाहर निकल जाते हैं और वे दुबारा शरीर में प्रविष्ट नहीं हो पाते* क्योंकि ‘म’ अक्षर तुरन्त शरीर के सारे दरवाजे (किवाड़) बन्द कर देता है ।
मानव शरीर पापों को भोगने के लिए मिला है, *जब सारे पाप ही शरीर से निकल जाएंगे* तो शरीर अपने-आप स्वस्थ, पवित्र और ओजयुक्त हो जाएगा ।
राम सिर्फ एक नाम नहीं अपितु एक मंत्र है, *जिसका नित्य स्मरण करने से सभी दु:खों से मुक्ति मिल जाती है।* राम शब्द का अर्थ है- मनोहर, विलक्षण, चमत्कारी, पापियों का नाश करने वाला व भवसागर से मुक्त करने वाला।
*'रामनाम' से आशय विष्णु के अवतार राम की भक्ति से है या फिर निर्गुण निरंकार परम ब्रह्म से।*
विद्वानों ने शास्त्रों के आधार पर राम के *तीन अर्थ निकाले हैं।* राम नाम का पहला अर्थ है *'रमन्ते योगिन: यस्मिन् राम:।'* यानी 'राम' ही मात्र एक ऐसे विषय हैं, जो योगियों की *आध्यात्मिक-मानसिक भूख हैं,* भोजन हैं, आनन्द और प्रसन्नता के स्त्रोत हैं।
राम का दूसरा अर्थ है, *'रति महीधर: राम:।',* 'रति' का प्रथम अक्षर 'र' है और 'महीधर' का प्रथम अथर 'म', राम। 'रति महीधर:' *सम्पूर्ण विश्व की सर्वश्रेष्ठ ज्योतित सत्ता है,* जिनसे सभी ज्योतित सत्ताएं ज्योति प्राप्त करती हैं।
' राम' नाम का का तीसरा अर्थ है, *'रावणस्य मरणं राम:'।* 'रावण' शब्द का प्रथम अक्षर है 'रा' और 'मरणं' का प्रथम अक्षर है 'म'। रा+ म= *राम यानी वह सत्ता, जिसकी शक्ति से रावण मर जाता है।*
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