03/07/2025
हुसैन-इब्न-ए-अली कर्बला को जाते हैं
मगर ये लोग अभी तक घरों के अंदर हैं क़त्ल-ए-हुसैन अस्ल में मर्ग-ए-यज़ीद है
इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद
फिर कर्बला के ब'अद दिखाई नहीं दिया
ऐसा कोई भी शख़्स कि प्यासा कहें जिसे. ता-क़यामत ज़िक्र से रौशन रहेगी ये ज़मीं
ज़ुल्मतों की शाम में इक रौशनी है कर्बला
दिल है प्यासा हुसैन के मानिंद
ये बदन कर्बला का मैदाँ है
तन्हा खड़ा हूँ मैं भी सर-ए-कर्बला-ए-अस्र
और सोचता हूँ मेरे तरफ़-दार क्या हुए