08/03/2026
सत्यनाम
धनी धर्मदास जी के अंतर्ध्यान दिवस पर भोग वितरण, विश्व शांति का संदेश
“कहे कबीर पुकार के, दो बातें सीख ले।
एक साहेब की बंदगी, और भूखे को कछु दे।। ”
साकची (जमशेदपुर)। सदगुरु कबीर साहेब जी के परम शिष्य धनी धर्मदास जी साहेब के पावन अंतर्ध्यान दिवस के अवसर पर सदगुरु कबीर धर्मदास वंशावली मिशन (झारखंड इकाई) द्वारा श्रद्धा एवं सेवा भाव से भोग वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार विक्रम संवत 1569 फाल्गुन पूर्णिमा के तृतीय पहर, जैमुनि लग्न में सदगुरु कबीर साहेब द्वारा उड़ीसा प्रांत में समुद्र तट पर धनी धर्मदास जी को जीवित समाधि प्रदान की गई थी। वह पावन स्थल आज ऐतिहासिक धरोहर सदगुरु कबीर चौरा के नाम से विख्यात है, जहाँ श्रद्धालु श्रद्धा-सुमन अर्पित करने पहुँचते हैं।
इसी पावन स्मृति को स्मरण करते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला प्रतिनिधि श्री गोविंद साहू जी के नेतृत्व में साकची स्थित रामलीला मैदान सब्जी विक्रेता मंडी परिसर में जरूरतमंदों के बीच भोग वितरण किया गया।
इस अवसर पर झारखंड राज्य प्रतिनिधि महंत श्री प्रकाश दास, राज्य सलाहकार महंत श्री साहेब दास, श्री सतेंद्र कुमार, श्री अजय शर्मा, श्री अनूप शर्मा हैश्री सुनील शर्मा, श्री राहुल आनंद , श्री अनछु प्रजापति श्रुति कुमारी , आरोही कुमारी , अमोल , अवाल सहित अनेक सेवकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान संत परंपरा के आदर्शों — सेवा, समर्पण और मानवता — को जन-जन तक पहुँचाने का संदेश दिया गया। साथ ही वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में मंडरा रहे युद्ध संकट के बीच विश्व में शांति, प्रेम और भाईचारे की स्थापना हेतु सामूहिक प्रार्थना की गई।
यह आयोजन समाज में मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।
सप्रेम — साहेब बंदगी साहेब
जारीकर्ता:
सदगुरु कबीर धर्मदास वंशावली मिशन (झारखंड इकाई)