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Kabir Bhajan Gyan कबीर भजन और सच्चा ज्ञान �
रोज़ नए भजन, सत्संग और जीवन बदलने वाली बातें
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09/10/2026

🎵 चेत रे नर चेत सबेरे | काल खड़ा तेरे द्वारे रे | कबीर साहेब चेतावनी भजन | Chetawani Bhajan

🙏 सत साहेब जी 🙏

Kabir Bhajan Gyan पर आपका हार्दिक स्वागत है। 🌸

🎵 “चेत रे नर चेत सबेरे” एक भावपूर्ण चेतावनी और सत्संग भजन है, जो हमें जीवन की नश्वरता, समय के मूल्य, मोह-माया और आत्म-जागरण का संदेश देता है।

जीवन का अमूल्य समय संसार की भागदौड़, धन-दौलत और मोह-माया में बीत जाता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि मानव जीवन अनमोल है और इसे सतगुरु के नाम-सुमिरन, अच्छे कर्म, प्रेम और आत्म-चिंतन में लगाना चाहिए।

भजन की प्रत्येक पंक्ति जीवन की एक सच्चाई को सामने रखती है—माटी से बने शरीर की नश्वरता, फूलों की तरह जीवन का मुरझाना, संसार का अस्थायी होना, परमात्मा को अपने भीतर पहचानना और सतगुरु के नाम का सहारा लेकर जीवन को सार्थक बनाना।

🙏 प्रेम और शांति से इस चेतावनी भजन को सुनिए और इसके संदेश पर अपने अंतर्मन में विचार कीजिए।

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🎵 SONG & VIDEO CREDITS
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• Track: Chet Re Nar Chet Sabere
• Category: Kabir Chetawani / Nirgun Bhajan
• Concept, Lyrics Adaptation & Direction: Daljit Singh
• Music & Composition: Daljit Singh
• Music Production: AI-assisted creative tools
• Visual Concept & Cinematic Video Production: Daljit Singh
• AI Visual Creation & Editing: Daljit Singh
• Channel: Kabir Bhajan Gyan

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📌 ABOUT THIS PRESENTATION
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इस प्रस्तुति में पारंपरिक संत-वाणी और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित भावों को आधुनिक संगीत एवं सिनेमाई दृश्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

गीत की प्रस्तुति, संरचना, संगीत संयोजन और वीडियो निर्माण को रचनात्मक रूप से तैयार किया गया है।

हमारा प्रयास है कि भक्ति, सत्संग और आत्म-जागरण से जुड़े संदेशों को आधुनिक एवं भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सके। 🙏

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📜 भजन के बोल
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[दोहा]

कबीर मंदिर लाख का, जड़िया हीरा लाल।
दिवस चार का पेखना, बिनसि जाएगा काल॥

झूठे सुख को सुख कहै, मानत है मन मोद।
खलक चबीना काल का, कछु मुख में कछु गोद॥

[कोरस]

चेत रे नर चेत सबेरे, काल खड़ा तेरे द्वारे रे।
झूठी माया झूठी काया, क्यों जनम अकारथ हारे रे॥
सतगुरु नाम जहाज बिना तू, कैसे उतरे पारे रे।
चेत रे नर चेत सबेरे, काल खड़ा तेरे द्वारे रे॥

माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय।
इक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूँगी तोय॥
चाक फिरत है काल का, घट गढ़े और फोड़े रे।
मिट्टी का यह कच्चा भांडा, पल में साहिब तोड़े रे॥

माली आवत देखकर, कलियाँ करे पुकार।
फूले-फूले चुन लिए, काल्हि हमारी बार॥
आज खिला जो फूल चमन में, कल माटी मिल जावेगा।
संसार रूपी इस बगिया से, खाली हाथ सिधावेगा॥

झीनी झीनी बीनी चदरिया, श्वासों का यह ताना।
मूरख ओढ़ मैली कीनी, भेद न इसका जाना॥
तार-तार जब टूट जाएगा, कौन इसे फिर सीवेगा।
साहिब का नाम नहीं जपा तो, कैसे जग में जीवेगा॥

तरुवर पंछी बसेरा कीना, सांझ पड़े उड़ जावे रे।
यह जग है इक रैन बसेरा, कोई न टिकने पावे रे॥
मुसाफिर समझ के डेरा डालो, काहे प्रीत बढ़ाई रे।
सौदा कर ले नाम रतन का, पूँजी काम जो आई रे॥

कस्तूरी कुंडल बसे, मृग ढूँढे बन माहिं।
ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखे नाहिं॥
बाहर भटके मूरख प्राणी, अंदर अलख जगाया ना।
हीरे जैसी स्वास गँवाई, सतगुरु भेद बताया ना॥

जिन बाँधे थे छत्र सिर पर, देश-विदेश कँपाए रे।
वो भी सोए धूल के भीतर, संग कछु न ले जाए रे॥
दो दिन की तेरी जमींदारी, काहे को इतरावे रे।
जब काल का डंडा बाजेगा, कोई काम न आवे रे॥

जैसे जल में काई फटे, फिर मिल जावे नीर।
ऐसे ही संसार छूटेगा, चेत कहे कबीर॥

कहत कबीर सुनो भाई साधो, मानुष जनम सुहावन रे।
सतगुरु की ले ओट बंदे, छूट जाए आवागमन रे॥
सुरति लगा ले उस मालिक में, नाम की ज्योत जलाए ले।
अमर लोक का मार्ग पाकर, निज घर वास बसाए ले॥

[कोरस]

चेत रे नर चेत सबेरे, काल खड़ा तेरे द्वारे रे।
झूठी माया झूठी काया, क्यों जनम अकारथ हारे रे॥
सतगुरु नाम जहाज बिना तू, कैसे उतरे पारे रे...
चेत रे नर चेत सबेरे... काल खड़ा तेरे द्वारे रे...

साहिब बंदगी... सतगुरु नाम...
चेत रे नर... चेत सबेरे...

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❤️ हमारा उद्देश्य
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हमारा उद्देश्य भक्ति, सत्संग, आत्म-जागरण और आध्यात्मिक विचारों को सरल एवं भावपूर्ण रूप में अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।

अगर यह भजन आपके मन को छू जाए तो ❤️ Like करें, अपने परिवार और संगत के साथ Share करें और Kabir Bhajan Gyan को Follow जरूर करें।

आपका प्रेम, सहयोग और शुभकामनाएँ हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। 🙏🌸

साहिब की कृपा आप सभी पर बनी रहे। 🙏

सत साहेब जी 🌸🙏

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🏷️ HASHTAGS
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27/09/2026

🎵 बीत गए दिन भजन बिना रे | कबीर साहेब चेतावनी भजन | Chetawani Bhajan

🙏 सत साहेब जी 🙏

Kabir Bhajan Gyan पर आपका हार्दिक स्वागत है। 🌸

🎵 “बीत गए दिन भजन बिना रे” एक भावपूर्ण चेतावनी और सत्संग भजन है, जो हमें जीवन की नश्वरता, समय के मूल्य, मोह-माया और आत्म-जागरण का संदेश देता है।

जीवन का अमूल्य समय संसार की भागदौड़ और मोह-माया में बीत जाता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि मानव जीवन अनमोल है और इसे सतगुरु के नाम-सुमिरन, अच्छे कर्म, प्रेम और आत्म-चिंतन में लगाना चाहिए।

भजन की प्रत्येक पंक्ति जीवन की एक सच्चाई को सामने रखती है—बचपन से जवानी, जवानी से बुढ़ापा और अंततः संसार से विदाई तक।

🙏 प्रेम और शांति से इस भजन को सुनिए और इसके संदेश पर अपने अंतर्मन में विचार कीजिए।

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🎵 SONG & VIDEO CREDITS
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• Track: Beet Gaye Din Bhajan Bina Re
• Category: Kabir Chetwani / Nirgun Bhajan
• Concept, Lyrics Adaptation & Direction: Daljit Singh
• Music & Composition: Daljit Singh
• Music Production: AI-assisted creative tools
• Visual Concept & Cinematic Video Production: Daljit Singh
• AI Visual Creation & Editing: Daljit Singh
• Channel: Kabir Bhajan Gyan

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📌 ABOUT THIS PRESENTATION
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इस प्रस्तुति में पारंपरिक संत-वाणी और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित भावों को आधुनिक संगीत एवं सिनेमाई दृश्यों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

गीत की प्रस्तुति, संरचना, संगीत संयोजन और वीडियो निर्माण को रचनात्मक रूप से तैयार किया गया है।

हमारा प्रयास है कि भक्ति, सत्संग और आत्म-जागरण से जुड़े संदेशों को आधुनिक एवं भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सके। 🙏

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📜 भजन के बोल
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[दोहा]

रात गँवाई सोय के, दिवस गँवायो खाय।
हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जाय॥

माटी का यह पूतला, माटी में मिल जाय।
काल सिरहाने आ खड़ा, तू क्यों रहा भुलाय॥

[कोरस]

बीत गए दिन भजन बिना रे, मन मूरख पछताय।
बीत गए दिन भजन बिना रे, बीती उमर बिहाय॥
सतगुरु शरण में आ जा बंदे, नाम की ओट समाय।
बीत गए दिन भजन बिना रे, मन मूरख पछताय॥

[अंतरा]

बालपना सब खेल गँवायो, समझ न आई बात।
अज्ञानता में उम्र गँवाई, बीती आधी रात॥
तरुन भयो तब रूप गुमाना, माया मोह लपटाय।
पाप पुन्य की सुध न राखी, झूठा जनम गँवाय॥

धन दौलत का महल बनाया, ऊँचा किया मकान।
चार दिना की चांदनी है, समझ ले मूरख ज्ञान॥
जोड़ी माया लाख करौरी, संग न कौड़ी जाय।
हाथ पसारे जग से निकला, सब कुछ यहीं छुटाय॥

बृद्ध भयो तब आलस उपज्यो, कांपन लागी देह।
आँखिन ज्योति मंद भई अब, छूटा जग का नेह॥
हाथ-पाँव अब थिर नहिं रहवे, मन में सोच समाय।
अब पछताए होत का जब, पंछी उड़-उड़ जाय॥

हाय रे काया कागद जैसी, बूँद पड़े गल जाय।
चेत सके तो चेत ले नर, जम की मार न खाय॥

हाथी घोड़ा महल अटारी, सब चक्की में जाय।
जिन कुटुंबन हित पाप कमायो, कोई काम न आय॥
चार जने मिल काठ चढ़ायो, फूँक दियो पल माहिं।
धुआँ उड़त आकाश में देख्यो, कोई संगी नाहिं॥

पंडित पढ़ पढ़ पोथी थाके, मूरख भरम न खोय।
ढाई आखर प्रेम का पढ़े, सो पंडित होय॥
तीरथ बरत सब कर के हारे, मन का मैल न जाय।
अंतर कपट न त्याग सके जो, भव से पार न पाय॥

काया नगर में नौ दरवाजे, दसवाँ गुप्त किवाड़।
खोल सके तो खोल ले घट, दिखे साहिब का द्वार॥
पाँच लुटेरे घट में बैठे, लूटत आठों याम।
इनसे बचे जो संत जना है, सिध हो ताके काम॥

कहत कबीर सुनो भाई साधो, चेत सवेरे भोर।
चक्की चलती काल की रे, छूटत नहिं कोई छोर॥
सतगुरु नाम जहाज बन्यो है, पार उतर तू जाय।
भज ले राम छूट संसारा, बहुरि न संकट पाय॥

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❤️ हमारा उद्देश्य
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हमारा उद्देश्य भक्ति, सत्संग, आत्म-जागरण और आध्यात्मिक विचारों को सरल एवं भावपूर्ण रूप में अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है।

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आपका प्रेम, सहयोग और शुभकामनाएँ हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। 🙏🌸

साहिब की कृपा आप सभी पर बनी रहे। 🙏

सत साहेब जी 🌸🙏

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🏷️ HASHTAGS
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16/09/2026

🙏 सत साहेब 🙏

यह भजन संत कबीर साहिब के गहरे आध्यात्मिक संदेशों से प्रेरित एक मौलिक रचना है।

“बिकता है बाजार में जीवन, साँस-साँस का मोल यहाँ...”
इन पंक्तियों के माध्यम से यह भजन हमें याद दिलाता है कि जीवन बहुत अनमोल है, लेकिन हम अक्सर धन, मोह-माया और संसार के भ्रम में अपना समय गंवा देते हैं।

महल, धन-दौलत और सांसारिक रिश्ते एक समय तक ही हमारे साथ रहते हैं। अंत में मनुष्य के साथ उसके कर्म और उसकी आध्यात्मिक कमाई ही जाती है।

यह भजन हमें भीतर से जागने, सतनाम को याद करने, माया के मोह से ऊपर उठने और परमात्मा के उस निराकार नूर को पहचानने का संदेश देता है। ✨

कुछ पल शांत होकर इस भजन को जरूर सुनिए। हो सकता है इसकी कोई एक पंक्ति आपके मन को छू जाए और जीवन को देखने का नजरिया बदल दे। 🙏🌿

✍️ रचना एवं प्रस्तुति: Daljit Singh
📺 कबीर भजन ज्ञान

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🙏 कमेंट में एक बार लिखें — “सतनाम” 🙏

कबीर साहेब की साखी हमें अहंकार छोड़कर प्रभु के प्रति सच्चे समर्पण का मार्ग दिखाती है।“तूं तूं करता तूं भया,मुझमैं रही न ...
07/09/2026

कबीर साहेब की साखी हमें अहंकार छोड़कर प्रभु के प्रति सच्चे समर्पण का मार्ग दिखाती है।

“तूं तूं करता तूं भया,
मुझमैं रही न हूं।
वारी तेरे नाउं परि,
जित देखौं तित तूं॥”

सच्ची भक्ति में जब मन प्रभु के नाम में रम जाता है, तो ‘मैं’ का भाव धीरे-धीरे मिटने लगता है। 🙏

आपको इस साखी से क्या सीख मिलती है? अपने विचार कमेंट में जरूर लिखें। 🌿

#कबीरसाहेब #कबीरवाणी #सत्संग #भक्ति #आत्मचिंतन

🙏 सत साहेब संगत जी 🙏कबीर साहेब की यह साखी हमें सच्चे प्रभु-प्रेम और आत्मचिंतन का संदेश देती है।“बिरहा बिरहा मति कहौ, बिर...
04/09/2026

🙏 सत साहेब संगत जी 🙏

कबीर साहेब की यह साखी हमें सच्चे प्रभु-प्रेम और आत्मचिंतन का संदेश देती है।

“बिरहा बिरहा मति कहौ, बिरहा है सुलतान।
जिहिं घट बिरह न संचरै, सो घट सदा मसान॥”

जब हृदय में परमात्मा के प्रति सच्ची तड़प और प्रेम जागता है, तभी भीतर से आत्मिक जागृति शुरू होती है। आइए इस संदेश को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। 🙏

आपको इस साखी का संदेश कैसा लगा? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। ❤️

#कबीरसाहेब #कबीरवाणी #सत्संग #आत्मचिंतन #प्रभुप्रेम

🙏 सत साहेब जी 🙏कबीर साहेब जी की यह साखी हमें जीवन की सच्चाई का बहुत गहरा संदेश देती है।जब तक जीवन रूपी यंत्र चल रहा है, ...
04/09/2026

🙏 सत साहेब जी 🙏
कबीर साहेब जी की यह साखी हमें जीवन की सच्चाई का बहुत गहरा संदेश देती है।

जब तक जीवन रूपी यंत्र चल रहा है, तब तक समय को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।

आज का समय ही हमारे हाथ में है। इसलिए प्रभु-स्मरण करें, अच्छे कर्म करें और अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करें।

अगर यह संदेश आपको अच्छा लगा हो तो पोस्ट को Like ❤️ करें और अपने प्रियजनों के साथ Share जरूर करें।
सत साहेब जी 🙏

#कबीरसाहेब #कबीरवाणी #कबीरकेदोहें #सतसाहेब #आध्यात्मिकज्ञान

🌸 आज का सत्संग 🌸संत कबीर साहेब जी की सीख हमें यही समझाती है कि जीवन में परिस्थितियाँ हमेशा हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेक...
04/09/2026

🌸 आज का सत्संग 🌸
संत कबीर साहेब जी की सीख हमें यही समझाती है कि जीवन में परिस्थितियाँ हमेशा हमारे हाथ में नहीं होतीं, लेकिन उन परिस्थितियों में हमारा मन कैसा रहे, यह बहुत हद तक हमारे हाथ में होता है।

सुबह की शुरुआत शिकायत से नहीं, बल्कि सुमिरन, अच्छे विचार और सकारात्मक सोच से करें।
जो बीत गया, उसे छोड़कर जो सामने है उसे प्रेम और धैर्य के साथ स्वीकार करें।

आपके लिए आज की सबसे बड़ी सीख क्या है?
कमेंट में जरूर लिखिए। 🌺
सत साहेब जी 🙏🌸

#कबीरसाहेब #कबीरवाणी #सत्संग #सुमिरन #कबीरभजनज्ञान

॥ सत साहेब जी ॥ 🙏"धन दौलत सब यहीं रह जाएगी,साहिब का नाम ही साथ निभाएगा।"संसार की झूठी शान, महल-मकान और धन-दौलत सब यहीं म...
03/09/2026

॥ सत साहेब जी ॥ 🙏

"धन दौलत सब यहीं रह जाएगी,
साहिब का नाम ही साथ निभाएगा।"

संसार की झूठी शान, महल-मकान और धन-दौलत सब यहीं मिट्टी में मिल जाने हैं। जब तक साँसों की डोरी चल रही है, तभी तक यह जग अपना है। अंत समय में केवल वही साथ जाएगा जो आपने प्रभु का नाम कमाया है और जो समय नेकी व बंदगी में बिताया है।

मोह-माया के अंधकार से जागें और साहिब के सच्चे नाम का सुमिरन करें।

अगर यह ज्ञान और विचार आपके मन को छू गया हो, तो पोस्ट को Like, Share करें और पेज को Follow ज़रूर करें! 🌺





03/09/2026

🎵 साहिब का नाम ही साथ जाएगा | अनमोल कबीर भजन 🎵

सन्देश:
संसार की मोह-माया, धन-दौलत और रिश्ते सब यहीं छूट जाने हैं। अगर कुछ साथ जाएगा, तो केवल प्रभु का नाम और आपके अच्छे कर्म। सुनिए यह ज्ञानवर्धक भजन और अपने मन में शांति का अनुभव कीजिए।

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🎙️ Creator Note:
इस वीडियो की शुरुआत में हमारे द्वारा विचार और भूमिका (Original Voice Commentary) प्रस्तुत की गई है, जिसके बाद आधुनिक ऑडियो तकनीक के माध्यम से तैयार यह मधुर भजन शुरू होता है। हमारा उद्देश्य कबीर साहेब की वाणी और अध्यात्म को नए स्वरूप में आप तक पहुँचाना है।

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✨ भजन की पंक्तियाँ:
"रे बन्दे क्यों इतना अभिमान करे,
जो आया है वो एक दिन जाए रे।
धन दौलत सब यहीं रह जाएगी,
साहिब का नाम ही साथ निभाए रे॥"

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सत साहेब!

🙏🌸 सत साहेब जी 🌸🙏संत कबीर साहेब जी की यह सीख हमें याद दिलाती है कि सच्ची भक्ति केवल बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि मन की प...
03/09/2026

🙏🌸 सत साहेब जी 🌸🙏

संत कबीर साहेब जी की यह सीख हमें याद दिलाती है कि सच्ची भक्ति केवल बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि मन की पवित्रता और अच्छे विचारों में होती है। ❤️

मन साफ हो तो हर पल भक्ति है,
और मन निर्मल हो तो जीवन में शांति, प्रेम और संतोष अपने आप आने लगते हैं।

आज एक बार स्वयं से जरूर पूछिए—
क्या हम दूसरों की कमियाँ देखने से पहले अपने भीतर झाँकते हैं? 🙏

अगर यह संदेश आपके मन को छू गया हो, तो कमेंट में प्रेम से लिखें—
🌸 “सत साहेब जी” 🌸

🙏 आपका दिन शुभ और मंगलमय हो। 🙏

#कबीरसाहेब #कबीरवाणी #सतसाहेब #कबीरभजनज्ञान #आध्यात्मिकज्ञान

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