श्रीकृष्ण भक्ति-साधना

श्रीकृष्ण भक्ति-साधना Shrikrishna, Almighty!
(1)

🦚श्रीकृष्ण की भक्ति और साधना🦚
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तुम्हारी कृपादृष्टि चाहिए भगवान,इस सांसारिक कष्ट से निवृत्तिचाहिए भगवान, कृपानिधान!...हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ ...
02/09/2026

तुम्हारी कृपादृष्टि चाहिए भगवान,
इस सांसारिक कष्ट से निवृत्ति
चाहिए भगवान, कृपानिधान!...

हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!🌹🌹🙏हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!🌹🌹🙏हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!🌹🌹🙏हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!🌹🌹🙏हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!🌹🌹🙏

🕉️ श्रीविष्णु सहस्रनाम: 21/22 🕉️अमृतांशूद्भवो बीजं शक्तिर्देवकिनन्दनः।त्रिसामा हृदयं तस्य शान्त्यर्थे विनियोज्यते।।21।।व...
02/09/2026

🕉️ श्रीविष्णु सहस्रनाम: 21/22 🕉️
अमृतांशूद्भवो बीजं शक्तिर्देवकिनन्दनः।
त्रिसामा हृदयं तस्य शान्त्यर्थे विनियोज्यते।।21।।
विष्णुं जिष्णुं महाविष्णुं प्रभविष्णुं महेश्वरम्।
अनेकरूप दैत्यान्तं नमामि पुरुषोत्तमम्।।22।

~ 'अमृतांशूद्भव' (चन्द्रमा से उत्पन्न भगवान) इस महामंत्र का बीज है, 'देवकीनन्दन' (देवकी नंदन श्रीकृष्ण) इसकी शक्ति हैं और 'त्रिसामा' इस मंत्र का हृदय है। इन सबका विनियोग (प्रयोग) मन, शरीर और आत्मा की परम शान्ति के लिए किया जाता है।
~ जो सर्वव्यापी (विष्णु), विजयी (जिष्णु), महान सर्वव्यापी (महाविष्णु), अत्यंत प्रभावशाली व समर्थ (प्रभविष्णु), महान ईश्वर (महेश्वर), अनेकों रूप धारण करने वाले तथा दैत्यों का अंत करने वाले (दैत्यान्त) हैं, उन सभी में उत्तम भगवान पुरुषोत्तम को मैं प्रणाम करता हूँ।

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🕉️ श्रीविष्णु सहस्रनाम: 14/15 🕉️एष मे सर्वधर्माणां धर्मोऽधिकतमो मतः।यद्भक्त्या पुण्डरीकाक्षं स्तवैरर्चेन्नरः सदा।।14।।पर...
01/09/2026

🕉️ श्रीविष्णु सहस्रनाम: 14/15 🕉️
एष मे सर्वधर्माणां धर्मोऽधिकतमो मतः।
यद्भक्त्या पुण्डरीकाक्षं स्तवैरर्चेन्नरः सदा।।14।।

परमं यो महत्तेजः परमं यो महत्तपः।
परमं यो महद्ब्रह्म परमं यः परायणम्।।15।।
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🕉️ श्रीविष्णु सहस्रनाम: 12/13 🕉️अनादिनिधनं विष्णुं सर्वलोकमहेश्वरम्।लोकाध्यक्षं स्तुवन्नित्यं सर्वदुःखातिगो भवेत्।।12ब्र...
31/08/2026

🕉️ श्रीविष्णु सहस्रनाम: 12/13 🕉️
अनादिनिधनं विष्णुं सर्वलोकमहेश्वरम्।
लोकाध्यक्षं स्तुवन्नित्यं सर्वदुःखातिगो भवेत्।।12
ब्रह्मण्यं सर्वधर्मज्ञं लोकानां कीर्तिवर्धनम्।
लोकनाथं महद्भूतं सर्वभूतभवोद्भवम।।13।।

~ जो भगवान विष्णु आदि और अंत से रहित (अनादि-निधन) हैं, संपूर्ण लोकों के महान ईश्वर हैं और समस्त लोकों के अध्यक्ष (स्वामी) हैं, उनका नित्य स्मरण या स्तोत्र पाठ करने वाला मनुष्य समस्त दुखों से मुक्त हो जाता है। वे भगवान ब्राह्मणों तथा वेदों के प्रेमी एवं रक्षक (ब्रह्मण्य) हैं, संपूर्ण धर्म के ज्ञाता हैं और भक्तों की कीर्ति को बढ़ाने वाले हैं।
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🕉️ श्रीविष्णु सहस्रनाम: 10/11 🕉️जगत्प्रभुं देवदेवमनन्तं पुरुषोत्तमम्।स्तुवन् नामसहस्रेण पुरुषः सततोत्थितः।।10।तमेव चार्च...
30/08/2026

🕉️ श्रीविष्णु सहस्रनाम: 10/11 🕉️

जगत्प्रभुं देवदेवमनन्तं पुरुषोत्तमम्।
स्तुवन् नामसहस्रेण पुरुषः सततोत्थितः।।10।

तमेव चार्चयन्नित्यं भक्त्या पुरुषमव्ययम्।
ध्यायन स्तुवन् नमस्यंश्च यजमानस्तमेव च।।11।।

~ जो संपूर्ण जगत के स्वामी हैं, देवों के देव हैं, अनंत (जिसका कोई अंत न हो) हैं और पुरुषों में उत्तम (पुरुषोत्तम) हैं; उन भगवान विष्णु के एक हजार नामों का निरंतर उठकर (सजग रहकर) स्तवन (गुणगान) करने से मनुष्य सब दुखों से पार हो जाता है।
~ उस अविनाशी (जिसका कभी क्षय न हो) परम पुरुष की नित्य भक्तिपूर्वक अर्चना (पूजा) करते हुए, उनका ध्यान करते हुए, उनकी स्तुति करते हुए, उन्हें नमस्कार करते हुए और उन्हीं का यजन (यज्ञ/आराधना) करते हुए मनुष्य परम गति को प्राप्त करता है।
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🕉️★ श्री विष्णु सहस्रनाम:4/5/6 ★🕉️व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे।नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नमः।।4अविकाराय...
29/08/2026

🕉️★ श्री विष्णु सहस्रनाम:4/5/6 ★🕉️
व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे।
नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नमः।।4

अविकाराय शुद्धाय नित्याय परमात्मने ।
सदैकरूपरूपाय विष्णवे सर्वजिष्णवे।।5

यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् ।
विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे।।6।।

🕉️ॐ नमो विष्णवे प्रभविष्णवे🕉️
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श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!...🌹🙏श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!...🌹🙏श्री कृष...
28/08/2026

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!...🌹🙏
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!...🌹🙏
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!...🌹🙏
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!...🌹🙏
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!...🌹🙏
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!...🌹🙏
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेव!...🌹🙏

★अथ श्रीविष्णु सहस्रनाम।। 2/3।।★यस्य द्विरदवक्त्राद्याः पारिषद्याः परः शतम्।विघ्नं निघ्नन्ति सततं विष्वक्सेनं तमाश्रये।।...
28/08/2026

★अथ श्रीविष्णु सहस्रनाम।। 2/3।।★
यस्य द्विरदवक्त्राद्याः पारिषद्याः परः शतम्।
विघ्नं निघ्नन्ति सततं विष्वक्सेनं तमाश्रये।।2

व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्रमकल्मषम्।
पराशरात्मजं वन्दे शुकतातं तपोनिधिम्॥3

~ जिनके हाथी के मुख वाले (गणेश जी) और सैकड़ों अन्य पार्षद (अनुचर) हमेशा सभी बाधाओं और विघ्नों को नष्ट करते हैं, मैं उन भगवान विश्वक्सेन (विष्णु जी के सेनापति) की शरण में जाता हूँ।
~ जो निष्कलंक हैं, तपस्या के अपार भंडार हैं और वसिष्ठ जी के परपोते, शक्ति के पोते, पराशर के पुत्र तथा शुकदेव जी के पिता हैं, उन महर्षि वेद व्यास को मैं प्रणाम करता हूँ।
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★ॐ अथ सकलसौभाग्यदायक श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् (एक) ★ 🕉️🌹❤️🌹🕉️शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।प्रसन्नवदनं ध्...
27/08/2026

★ॐ अथ सकलसौभाग्यदायक श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् (एक) ★
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शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये।।1।
🕉️🌹❤️🌹🕉️

~ जो श्वेत (सफेद) वस्त्र धारण करते हैं, जो सर्वव्यापक हैं, जिनका शरीर चंद्रमा के समान उज्ज्वल है, जिनकी चार भुजाएं हैं और जिनका मुख हमेशा प्रसन्न रहता है, ऐसे भगवान का हम सभी बाधाओं (विघ्नों) को शांत करने के लिए ध्यान करते हैं।
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बालं नवीनशतपत्रविशालनेत्रं बिम्बाधरं सजलमेघरुचिं मनोज्ञम् ।मन्दस्मितं मधुरसुन्दरमन्दयानं श्रीनन्दनन्दनमहं मनसा नमामि।।  ...
26/08/2026

बालं नवीनशतपत्रविशालनेत्रं
बिम्बाधरं सजलमेघरुचिं मनोज्ञम् ।
मन्दस्मितं मधुरसुन्दरमन्दयानं
श्रीनन्दनन्दनमहं मनसा नमामि।।

~ जिनके नेत्र नूतन विकसित शतदल कमल के समान विशाल है, अधर बिम्बाफल की अरुणिमा को तिरस्कृत करनेवाले हैं तथा श्रीसम्पन्न अङ्ग सजल जलधर की श्याम-मनोहर कार्ति को छीने लेते हैं, जिनके मुख पर मन्द मुसकान को दिव्य छटा छा रही है तथा जो सुन्दर मधुर मन्दगति से चल रहे हैं, उन बाल्यावस्था से विकसित मनोज्ञ श्रीनन्दनन्दन को मैं मन से प्रणाम करता हूँ!..
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