Eidgah Basgit ईदगाह बसगित Allahabad

Eidgah Basgit ईदगाह बसगित Allahabad Basgit

21/08/2025
16/01/2025
30/12/2024

न्यू ईयर 2025 में दो दिन का समय बचा है और लोग इसकी तैयारियों में जुटे हुए हैं. इन सब के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने नए साल का जश्न मनाने को लेकर फतवा जारी किया है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए नए साल का जश्न मनाना नाजायज है. फतवे में कहा गया है कि नए साल पर जो नौजवान लड़के-लड़कियां जश्न मनाते हैं यह सही नहीं है. नए साल का जश्न नहीं मनाया जाना चाहिए और न ही मुबारकबाद देनी चाहिए. जो कोई भी नए साल का जश्न मनाएगा वह गैर इस्लामिक है और जो मुसलमान नए साल का जश्न मनाएगा वह शरीयत के खिलाफ होगा.

25/10/2024

मुहब्बत की अलामत

लोग ताज महल को मुहब्बत की अलामत क़रार देते हैं, मगर उस्मानी दौर में मस्जिद-ए-नबवी (सलल्लाहु अलैहि व सल्लम) की तामीर,,,, तामीरात की दुनिया में मुहब्बत और अक़ीदत की मेराज है...।

ज़रा पढ़ीये! और अपने दिलों को इश्क़-ए-नबी (सल्लललाहु अलैहि व सल्लम) से मुनव्वर करिये...।

तुर्कों ने जब मस्जिद-ए-नबवी (सलल्लाहु अलैहि व सल्लम) की तामीर का इरादा किया तो उन्होंने अपनी वसीअ रियासत में ऐलान किया कि उन्हें इमारत साज़ी से मुताल्लिक़ फ़नून के माहिरीन दरकार हैं...। ऐलान करने की देर थी कि हर इल्म के माने हुए लोगों ने अपनी ख़िदमात पेश की... सुलतान के हुक्म से इस्तम्बोल के बाहर एक शहर बसाया गया जिसमें अतराफ़-ए-आलम से आने वाले इन माहिरीन को अलग अलग महलों में बसाया गया... इसके बाद अक़ीदत और हैरत का ऐसा बाब शुरू हुवा जिसकी नज़ीर मिलना मुश्किल है, ख़लीफ़ा-ए-वक़्त जो दुनिया का सबसे बड़ा फ़रमां रवा था, ख़ुद नए शहर में आया, और हर शोबे के माहिर को ताकीद की के अपने ज़हीन तरीन बच्चे को अपना फ़न इस तरह सिखाए कि उसे यकता-ओ-बेमिसाल कर दे... इसी अस्‍ना में तुर्क हुकूमत उस बच्चे को हाफ़िज़-ए-क़ुरआन और शह सवार बनाएगी... दुनिया की तारीख़ का ये अजीब-ओ-ग़रीब मंसूबा कई साल जारी रहा...।

25 साल बाद नौजवानों की ऐसी जमाअत तैयार हुई जो ना सिर्फ़ अपने शोबे में यकता-ए-रोज़गार थे, बल्कि हर शख़्स हाफ़िज़-ए-क़ुरआन और बा अमल मुसलमान भी था... ये लगभग 500 लोग थे... इसी दौरान तुर्कों ने पत्थरों की नई कोह दरयाफ्त की, नए जंगलों से लकड़ियाँ कटवाई, तख़्ते हासिल किए गए, और शीशे का सामान बाहम पहुंचाया गया, ये सारा सामान नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के शहर मदीना पहुंचाया गया...। अदब का तो ये आलम था कि उसे रखने के लिए मदीना से दूर एक बस्ती बसाई गई ताकि शोर से मदीना का माहोल ख़राब ना हो, नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अदब की वजह से अगर किसी कटे हुवे पत्थर में भी तरमीम की ज़रूरत पड़ती तो उसे वापस उसी बस्ती भेजा जाता, माहेरीन को हुक्म था कि हर शख़्स काम के दौरान बा वुज़ू रहे, और दरूद शरीफ़ और तिलावत-ए-क़रान में मशग़ूल रहे, हुजरा मुबारक की जालियों को कपड़े से लपेट दिया गया कि गर्द-ओ-गुबार अंदर रौज़ा-ए-पाक में ना जाए...। सुतून लगाए गए कि रियाज़-उल-जन्ना और रौज़ा-ए-पाक पर मिट्टी ना गिरे... ये काम पंद्रह साल तक चलता रहा, और तारीख़-ए-आलम गवाह है, ऐसी मुहब्बत ऐसी अक़ीदत से कोई तामीर ना कभी पहले हुई और ना कभी मुस्तक़बिल में होगी...।

✍️ TanveerTayagi

21/10/2024
18/09/2024
23/07/2024
02/05/2024

Address

Villege And Post Basgit Allahabad
Allahabad
221508

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Eidgah Basgit ईदगाह बसगित Allahabad posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share