15/05/2026
पुरुषोत्तम मास का महत्व | Lord Vishnu | Lord Krishna | Dr Krunal Joshi
प्राचीन समय में पुरुषोत्तम मास को मलमास कहा जाता था और उसे अशुभ माना जाता था। जब मलमास भगवान नारायण के समक्ष अपनी पीड़ा लेकर पहुंचा, तब भगवान ने करुणा करके उसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” प्रदान किया। तभी से यह मास भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला पवित्र पुरुषोत्तम महीना माना जाता है। पुरुषोत्तम मास में अखंड दीप प्रज्वलित करना, भगवान विष्णु का पूजन, पुरुष सूक्त पाठ, विष्णु सहस्रनाम, द्वादशाक्षर मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप तथा श्रीमद्भागवत एवं शिव महापुराण जैसे पवित्र ग्रंथों के श्रवण का विशेष महत्व है। यह पावन मास भक्ति, जप, तप, सत्संग और निष्काम कर्म के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आत्मशुद्धि, पुण्य वृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए पुरुषोत्तम मास सनातन धर्म में विशेष स्थान रखता है। श्रद्धा, भक्ति, भगवान स्मरण और आध्यात्मिक चिंतन से परिपूर्ण यह दिव्य संदेश सकारात्मक ऊर्जा और भक्तिमय प्रेरणा प्रदान करता है।