01/01/2021
आज एक जनवरी है, नए साल का पहला दिन होने के साथ साथ इस दिन में आगरा की जनता के लिए एक और ख़ास बात है. आज ब्रज क्षेत्र के महान हिन्दू वीर गोकुला जाट का बलिदान दिवस भी है. ये मेरे लिए हमेशा अचरज की बात रही है की सुदूर क्षेत्रो के हिन्दू वीरो पर गर्व करनी वाली हमारी जनता अपने क्षेत्र में मुगलों को चुनौती व शुरूआती दौर में जोरदार पटखनी देने वाले वीर योधा के बारे में इतनी उदासीन क्यों है. आगरा से लेकर हरयाणा तक और अलीगढ से लेकर राजपुताना की सीमाओ तक फैले मध्यकाल के प्रथम हिन्दू राज्य का सूत्रपात करने वाले वीर गोकुला के बारे में शायद ज्यादातर लोग जानते ही नहीं है, और जो जानते भी है उनमे से ज्यादातर उन्हें एक वर्ग विशेष का नेता मानते है जबकि सच्चाई इस के बिलकुल अलग है. गोकुला जाट समाज से जरूर थे परन्तु नेतृत्व उन्होंने मेव, जाट, मीना, गुर्जर, गडरिया, नरुका इत्यादि सभी समाजो का किया था. ये अप्रसिक्षित किसान, मजदूर और आम नागरिक मुगलों के अत्याचारसे त्रस्त आ कर सपोर के युद्ध में मुग़ल सेना पर बिजली बन कर टूट पढ़े और देखते ही देखते विश्व की आधुनिकतम और सुसज्जित सेना को रौंद दिया. जिन लोगो को ये महान कार्य जाट विद्रोह का नाम दिए गए NCERT के छोटे से पैराग्राफ जैसा लगता है उन्हें खुद को स्वतंत्र कहलाने का कोई हक़ नहीं, क्योंकि उस युद्ध में और आने वाले समय में हुए हजारो युद्धों में दिए गए बलिदानों का कारन कोई व्यक्ति विशेष या जाती विशेष के लिए सामान जनक जीवन वापस पाना ही ध्येय नहीं था बल्कि समग्र हिन्दू समाज को उस दासता और पराधीनता से मुक्त करवाना था जिसने लोगो की हिम्मत को जंजीरों में जकड कर पंगु बना दिया था. गोकुला या गोकुल सिंह जी की नेतृत्व क्षमता इसी बात से साबित हो जाती है की तिलपत का युद्ध चार दिन तक चलता रहा था जबकि मुग़ल सेना का मुकाबला करने के लिए हिन्दुओ के पास न परिष्कृत हथीयार थे न तोपे. इन सब के बावजूद जब युद्ध हरने के बाद गोकुल सिंह और उनके परिवार के लोगो को औरंगजेब के समक्ष प्रस्तुत किया गया तो उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए मुसलमान बनने की जगह अपने शीश का बलिदान अपने धरम के लिए हँसते हँसते दे दिया. ये बढ़ी पीड़ाजनक बात है की ब्रज के लोग जो हजारो वर्ष पुराने महाभारत के युद्ध को आज भी याद रखते है वोह कृष्णा रावत, गोकुल सिंह, मोह्काम सिंह जैसे हिन्दू वीरो को भूल गए जिन्होंने अपने परिवार का सर्वस्व अपने धर्म पर बलिदान दे दिए. ऐसे महान हिदू सेनानी को सादर श्रद्दांजलि. अगर अपने ये पोस्ट पूरी पढ़ी है तो कृपया इसे शेयर करे और अपने भाइयो को इन महान वीरो के इतिहास से अवगत कराये. आगरा में आगरा किले अथवा कोतवाली के अन्दर वीर गोकुला की एक प्रतिमा स्थापित हो ऐसी इच्छा दिल में है, आप लोगो से निवेदन है की साथ आये ताकि इन महावीर को वोह सम्मान दिलवाया जा सके जो उनके बलिदान के आगे बहुत छोटा है. धन्यवाद .
India is a land of Brave souls. unfortunately, most of them stand forgotten today. One such brave man was GOKULA JAT a farmer from Mathura who raised a revol...