Radha Raman Mandir Europa

Radha Raman Mandir Europa This is the European outpost for Sri Radha Raman Temple in Vrindavan. Supported by Sri Kartik Goswami Maharaj and other associates of Sri Radha Raman Lal jiu

There is one temple in Vrindavan that cuts across sectarian boundaries, and is received with undistilled love and adoration, with the disarming charm of a toddler entering into neighbourhood houses, it is Radha Raman. The original deity has survived the trials of the Mughal times, and mystified the British into leaving Him alone with His servitors, thus preserving an ancient tradition. This is a t

emple that retains its purity of worship, its steadfastness of devotion simply because it didn't change into a business house, like so many other religious institutions in India. The reason behind this is simple: This temple is established to serve God as if He is at home, for His pleasure alone, not to display Him to the public at large. Consequently, the congregation at this temple continues to be exclusive in character, yet inclusive of all humanity.

31/05/2026

Did you know that Mahaprabhu only ever initiated one disciple? Just one. Properly, by ritualistic initiation.
Gopala Bhatta Goswami.
To establish the Radha Raman service. And that is the only original deity in Vrindavan, the only one who stands in the altar without a Radharani deity (because it’s a combined form of RadhaKrsna like Caitanya Mahaprabhu), that inspires no sectarian divisions and is simultaneously worshipped as a child and a form of Narasimha (as a saligram with teeth)

19/05/2026

युगल सम्मिलित तनु भगवान् श्रीमच्चैतन्यदेव की सेविता रजमणिमयी कालिन्दी कूलवर्तिनी श्रीराधाकृष्ण की नित्य निभृत निकुञ्ज स्वयम्भु भगवान् श्रीराधारमणदेव की दिव्य प्राकट्य स्थली श्रीमद् गोपालभट्टगोस्वामीपाद की भजन-साधन-रसास्वादन-उन्मादन-ग्रन्थ प्रणयन-चिन्तन तथा अवस्थान भूमि तथा अखिल विश्व सम्मिलन मण्डल

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01/05/2026

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🙌🏼 आज हमारे प्राण सर्वस्व श्री श्रीराधारमण देव जू के 484 वें प्राकट्य महोत्सव की सभी को कोटि-कोटि बधाई !!

दक्षिण स्थित बेल्गुरी ग्राम में एक अनन्य वैष्णव श्रीवेंकट भट्ट जी के यहाँ श्री गोपाल भट्ट जी का जन्म 1556 वैक्रमीय माघ कृष्ण तृतीया को हुआ।जो बचपन से ही प्रतिभा शाली, सौम्य, सुशील थे।

दक्षिण यात्रा के समय प्रेमावातार श्रीराधाकृष्ण के अभिन्न स्वरुप कलि पावनावतार श्रीचैतन्य महाप्रभु जी ने इन्हीं श्रीवेंकट भट्ट जी के पास चातुर्मास्य किया था।

श्रीमन्महाप्रभु ने श्रीगोपाल भट्ट जी को स्वयं अष्टादशाक्षरीय गोपालमन्त्र की दीक्षा प्रदान की।और अविवाहित रहकर पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करने, माता पिता के जीवित रहते उनके समीप रहने, सम्पूर्ण सर्वशास्त्रों का विध्याध्य्न करने, उपरांत श्रीवृन्दावन आकर भजन, संकीर्तन, चिंतन और शास्त्र मर्म प्रकट करने वाले उत्कृष्ट ग्रंथों के प्रणय के साथ सर्व वैश्नावोप्योगी हरिभक्ति विलास वैष्णव स्मृति की सर्वशास्त्र प्रमाण युक्त रचना करने की एवं श्रीवृन्दावन में श्री राधागोविंद की निभ्रत लीलाओं तथा लीला स्थलियों को प्रकट करने की आज्ञा दी।

श्रीमन्महाप्रभु के आदेश प्रवाह में प्रवाहित होते हुए श्री गोस्वामी पाद श्रीधाम वृन्दावन पधारे तथा सुभद्र संत परिवेश में अन्यतम होकर भजन भाव रत विराजने लगे।

इनका स्वरूप अर्जित अभिराम तथा स्वभाव भाव दिव्यातिदिव्य ललाम था।इनके नृत्य, लय, ताल, मधुर स्वर, समन्वित पदावली, श्लोकवली एवं नामावली संकीर्तन के समय श्री धाम के समस्त समवेत भक्तगण समाहित-उन्मत और विभोर होकर अश्रुपात करते थे।

श्रीगोपालभट्ट जी में श्री महाप्रभु के नीलांचल जाकर दर्शन करने की उत्कृष्ट लालसा थी जो उत्तरोतर तीव्र विरह में परिणत होकर उन्हें अति विह्वल करती रहती।

श्रीगोपाल भट्ट पाद के भजन, शास्त्र सृजन तथा स्वरति रस निमग्न से अभिभूत होकर श्रीमहाप्रभु ने अपने धारण किये हुए दिव्य वस्त्र डोर, कोपीन, बहिर्वास, योगपट (पीठासन)तथा सन्देश पत्रिका अपने स्वकृपारूप वैष्णव जन के द्वारा श्री गोस्वामी जी के लिए वृन्दावन प्रेषित किये।

पत्रिका में उल्लेख था,"तुम्हे नीलांचल आने की अपेक्षा नहीं, मैं ही तुम्हारे पास वृन्दावन आ रहा हूँ"। सारे भक्त आर्तनाद कर उठे। श्रीभट्ट जी की अवस्था तो अवर्णननीय विरह की पराकाष्ठा में पहुँच गयी।

रात्रि भर कालिंदी कूल कुटीर में हा ! गौरहरि..हा! गौरहरि--कहकर रूदन करते रहे, तड़पते रहे।

श्री चैतन्य महाप्रभु का स्वप्नादेश प्राप्त कर देववन, बद्रिकाश्रम होते हुए परम स्थल गंडगी नदी से श्री दामोदर लक्षण युक्त विलक्षण शालिग्राम प्राप्त किया।

श्रीवृन्दावन आकर बड़े भाव-विरह से श्री दामोदर शिला की अर्चना -सेवा करने लगे।सर्वांग श्रृंगार कला निष्णात आचार्य पाद स्तम्भ से भगवान् श्री नृसिँह के प्राकटय लीला चरित्र से अत्यंत अभिभूत हो उठे तथा अहोरात्रि पर्यंत अश्रुपात करते रहे और संवत 1599 वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को प्रात:ब्रह्म महूर्त में दामोदर शिला की अर्चना हेतु जब पिटकोनमोचन किया ... तो श्री दामोदर शिला से भगवान श्रीराधारमण देव भट्ट प्रभु की अर्चना स्वीकार करने हेतु प्रकट हो गए।

अपने गुरुदेव श्री मन्महाप्रभु को श्री राधारमण देव के रूप में विग्रहवंत निहारकर श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी पाद और श्री दामोदर दास गोस्वामी पाद आनंद के अपार पारावार में निमग्न हो गए।

श्री मन्महाप्रभु जी श्री जगन्नाथ विग्रह में अर्न्तध्यान होकर स्वयंभू श्रीराधारमण विग्रह में साक्षात् प्रकट हो गए।

कालिंदी कूल का यह पूजा स्थल ही डोल है।यहीं पर रासलीला के समय श्रीकृष्ण ने श्रीराधा का अनखशिख श्रृंगार किया।

अन्नंतर गोपीगण परितोष के हेतु स्वयं अर्न्तध्यान हो गए। *प्रिया जी ने "हा! रमण प्रेष्ठ क्वासि क्वासि महाभुज" विरह में यह उच्चारण किया और इसी आधार से श्री भट्ट जी ने श्री विग्रह का नाम 'श्रीराधारमण' रख दिया।*

श्रीगोपाल भट्ट गोस्वामी कलिकाल में भगवान् सनकादिकों के अवतार श्री प्रहलाद जी के समान ही है। जिनके प्राणानुराग से श्रीदामोदर शालिग्राम शिला से श्रीराधारमण देव का आलौकिक आविर्भाव हुआ।श्रीराधारमण देव के अनेक अलौकिक चमत्कार और प्रत्यक्ष श्रीराधागोविंद तथा श्री मन्महाप्रभु होने की अनुभूतियाँ और अनुग्रह की गाथाएं भक्तो को आनंदविभोर करती हैं।

🙌🏼 श्रीगोपालभट्ट प्राणधन श्रीराधारमण देव जू

In the spirit of Goswami Tulasidas, whose mission was to bring the sacred untouchable scriptures to the ordinary masses,...
14/01/2026

In the spirit of Goswami Tulasidas, whose mission was to bring the sacred untouchable scriptures to the ordinary masses, in their own language, we bring you the Bhagavad Gita for Generation Alpha

The message of Lord Krishna must be broadcast to the new generation in their own language to keep the glory alive

for Generation Alpha

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11/01/2026

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Substack for the Radha Raman Mandir in Europe. Click to read Radha's Substack, by Radha Raman Europa, a Substack publication. Launched 7 minutes ago.

https://www.youtube.com/watch?v=CKgBIm3WxsE
15/11/2025

https://www.youtube.com/watch?v=CKgBIm3WxsE

This is the film that Radha Raman Lal, the most charming Deity in Vrindavan, commissioned for the benefit of his devotees. The camera was left to wander, lik...

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